वाराणसी: शिक्षा और संस्कारों के संगम, ‘एम्बिशन स्कूल वाराणसी’ पड़ाव में वार्षिक उत्सव ‘स्मृतम संवर्धनम्’ का भव्य आयोजन बुधवार को अत्यंत हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। विद्यालय के डायरेक्टर विवेक मिश्रा और प्रिंसिपल अंजू दुबे के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम ने बच्चों की रचनात्मकता और भारतीय संस्कृति की अनूठी झलक पेश की।
शहर के प्रतिष्ठित ‘एम्बिशन स्कूल वाराणसी’ पड़ाव में वार्षिक उत्सव ‘स्मृतम संवर्धनम्’ का भव्य आयोजन किया गया। इस समारोह में विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने अपनी कलात्मक प्रतिभा और कौशल से एक ऐसी शाम सजाई, जो दर्शकों की यादों में लंबे समय तक अंकित रहेगी।
पौराणिक वैभव: गणेश जन्म से नरसिम्हा अवतार तक
समारोह का मुख्य आकर्षण पौराणिक मंचन रहा। छात्रों ने गणेश जन्म की कथा को अत्यंत भावुकता के साथ प्रस्तुत किया। वहीं, जब मंच पर भगवान नरसिम्हा का अवतार हुआ और हिरण्यकश्यप का वध दिखाया गया, तो पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। मां काली के रौद्र रूप की प्रस्तुति ने दर्शकों में जोश भर दिया और नारी शक्ति का संदेश दिया।
काशी की दिव्यता और गंगा आरती
वाराणसी की मिट्टी से जुड़े इस स्कूल ने मंच पर ‘काशी दर्शन’ के माध्यम से मिनी बनारस उतार दिया। डमरूओं की गूंज और शंखनाद के बीच जब बच्चों ने भव्य गंगा आरती का प्रदर्शन किया, तो उपस्थित अभिभावकों को दशाश्वमेध घाट की दिव्यता का अनुभव हुआ।
वर्दी को सलाम: आर्मी और पुलिस की शौर्य गाथा
देशभक्ति के खंड में बच्चों ने इंडियन आर्मी और पुलिस की भूमिका पर आधारित एक जोशीला नाटक और परेड प्रस्तुत की। सीमा पर तैनात जवानों के बलिदान और समाज की सुरक्षा में लगी पुलिस की कर्तव्यनिष्ठा को देख दर्शकों की आंखें नम हो गईं।
बेटियों ने दिखाया दम: “मैदान में किसी से कम नहीं लड़कियां”
कार्यक्रम के दौरान ‘स्मृतम संवर्धनम्’ के मंच से एक और सशक्त संदेश दिया गया कि आज की लड़कियां किसी भी क्षेत्र में, विशेषकर क्रिकेट और खेल के मैदान में, लड़कों से पीछे नहीं हैं।
लघु भारत का दर्शन
विविधता में एकता का संदेश देते हुए छात्रों ने भारत के विभिन्न राज्यों के सांस्कृतिक नृत्यों की लड़ी पिरोई। पंजाब का भांगड़ा, दक्षिण भारतीय नृत्य और पूर्वोत्तर के लोक नृत्य के माध्यम से विद्यालय ने ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का दृश्य प्रस्तुत किया।
मार्गदर्शन और प्रेरणा
इस अवसर पर डायरेक्टर विवेक मिश्रा ने कहा, “स्मृतम संवर्धनम् केवल एक वार्षिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह हमारे छात्रों की प्रतिभा और हमारे सांस्कृतिक मूल्यों का उत्सव है। हम बच्चों को वैश्विक नागरिक बनाने के साथ-साथ अपनी जड़ों से जोड़े रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
प्रिंसिपल अंजू दुबे ने विद्यालय की वार्षिक उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा, “गणेश जन्म से लेकर आर्मी शो तक, आज मंच पर जो भी दिखा वह बच्चों और शिक्षकों की महीनों की मेहनत का परिणाम है। हम शिक्षा के साथ-साथ बच्चों के चरित्र निर्माण पर विशेष ध्यान देते हैं।”