बिहार 2025: सीट बंटवारे की राजनीति बिसात पर
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 करीब आता जा रहा है, और प्रमुख राजनीतिक दलों व गठबंधनों के बीच सीटों के बंटवारे की रस्साकशी ने राज्य की सियासी हलचल को और गरमा दिया है। चुनाव आयोग ने 6 एवं 11 नवंबर को मतदान करने का कार्यक्रम घोषित किया है, और इस बीच गठबंधन अंदरूनी फैसलों में फँसे नजर आ रहे हैं।
NDA के अंदर: BJP, JDU एवं चिराग पासवान की तकरार
एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) के भीतर सीट शेयरिंग चर्चाएँ सबसे अधिक विवादों के केंद्र में हैं।
सूत्रों के अनुसार, भाजपा और जदयू लगभग बराबर संख्या में सीटें लड़ने पर विचार कर रहे हैं। वहीं, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान अपनी पार्टी को 45–54 सीटों का प्रस्ताव दे चुके हैं, जबकि भाजपा उन्हें 20–25 सीटों का प्रस्ताव देना चाहती है। पासवान की मांग है कि वे जिन पाँच लोकसभा सीटों पर जीते हैं, वहां से प्रत्येक लोकसभा क्षेत्र में कम से कम 2 विधानसभा सीटें उन्हें मिलें। दूसरी ओर, हम (Hindustani Awam Morcha) के नेता जीतन राम मांझी भी अपनी हिस्सेदारी चाहते हैं, चर्चा है कि उन्हें 15 सीटों की मांग हो सकती है। भाजपा के बिहार प्रभारी धमेंद्र प्रधान व संगठन प्रभारी विनोद तावड़े ने दिल्ली में पासवान के साथ बातचीत की। इसके अलावा, एनडीए गठबंधन के भीतर छोटे दल जैसे RLSP आदि को भी कुछ सीटें देने की संभावनाएं देखी जा रही हैं। सूत्रों का अनुमान है कि एनडीए की ओर से सीट बंटवारा 9 अक्टूबर तक घोषित हो सकता है।
इन सब पहियों के बीच, यह जटिल समीकरण बना है कि किसे कितनी सीट मिले — और किसकी मांगें पूरी हों, किसे पीछे छोड़ दिया जाए।
महागठबंधन (INDIA / Grand Alliance) की उलझनें
एनडीए जितना ही महागठबंधन (अक्सर “INDIA ब्लॉक” या “Grand Alliance”) में सीट बंटवारे को लेकर विवाद है:
RJD मुख्य दल के रूप में, कांग्रेस को लगभग 50–55 सीटें देने की चर्चा है। RJD खुद 125–130 सीटों की दावेदारी कर रहा है। विकासशील इंसान पार्टी (VIP) अब “18–20 सीटें” मांग रही है, जबकि वाम दलों जैसे CPI (ML) – माले आदि कम से कम 30–35 सीटों की मांग कर रहे हैं। VIP के प्रमुख मुकेश सहनी की ओर से यह बताया गया है कि गठबंधन में सीटबंटवारा “अंदरूनी रूप से तय हो चुका है” और जल्दी ही प्रेस कॉन्फ्रेंस करके घोषणा हो सकती है। मगर कांग्रेस की ओर से कहा जा रहा है कि उन्हें अभी भी “भाव नहीं मिल रहा” है, और वे अधिक सीटों की मांग पर अड़ गए हैं। तीसरे दर्जे के दल जैसे वाम एवं अन्य साझेदारों की मांगों के कारण समीकरण और पेचीदा हो गया है।
इस तरह, महागठबंधन की ओर से सीटबंटवäre की प्रक्रिया लगभग अंत तक पहुंची है, लेकिन अंतिम रूप अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
मुख्य चुनौतियाँ और प्रश्नचिन्ह
मांगों का टकराव: छोटे दलों की बड़ी-बड़ी मांगें और मुख्य दलों की संतुलन की कोशिशें अक्सर पासे की बाजी बन जाती हैं। “क्वालिटी” बनाम संख्या: खासकर चिराग पासवान की रणनीति इस बार “वे सीटें जहाँ जीत सुनिश्चित हो” की मांग पर केंद्रित है — न कि सिर्फ अधिक सी ाटें लेने पर। समय-सीमा दबाव: दोनों गठबंधन चाहते हैं कि सीट वितरण जल्द घोषित हो ताकि उम्मीदवारों की तालमेल और प्रचार रणनीति तैयार हो सके — एनडीए घोषणा 9 अक्टूबर तक करने की सोच में है। संघर्षों का संतुलन: इस बंटवारे के पीछे केवल सीटों का मामला नहीं है, बल्कि मुख्यमंत्री पद, उप मुख्यमंत्री, टिकट वितरण, कब्जा किए गए सीटों का महत्व — ये सभी समीकरण इस बंटवारे को और जटिल बनाते हैं। घुटने से नहीं झुकने वाले दल: यदि किसी दल को अपेक्षित सीटें नहीं मिलें, तो वह गठबंधन से बाहर हो जाने या अकेले चुनाव लड़ने की धमकी दे सकता है — यह स्थिति दोनों तरफ़ दबाव बनाती है।
निष्कर्ष — अभेद्य समीकरण या टूटती गठबंधन?
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए सीट बंटवारे की लड़ाई अभी पूरी तरह से तय नहीं हुई है। एनडीए में चिराग पासवान की मांगें, जदयू और भाजपा के बीच संतुलन, और छोटे दलों की भूख इस प्रक्रिया को उलझा रही है। वहीं, महागठबंधन में RJD, कांग्रेस, VIP और वाम दलों के बीच तालमेल बनाना आसान नहीं।
यदि सीट बंटवारा देर से घोषित होता है या किसी दल की मांग पूरी नहीं होती, तो गठबंधन में दरार के संकेत भी मिल सकते हैं। इस चुनाव में यह देखना होगा कि आखिर किस दल को कितनी हिस्सेदारी मिलती है — और कितनी पार्टियाँ इस बंटवारे से संतुष्ट रहेंगी।