डुमराँव (बक्सर):
डुमराँव विधानसभा सीट पर इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प चौखाने में दिखाई दे रहा है। स्थानीय सर्वे के मुताबिक अजीत कुशवाहा सबसे आगे हैं — और यह बात इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वे भाकपा-माले (CPI-ML Liberation) के सक्रिय नेता और वर्तमान/सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में जाने जाते हैं।
प्रमुख प्रतिद्वंदी (पार्टी के साथ)
अजीत कुशवाहा — भाकपा-माले (CPI-ML)। राहुल कुमार सिंह — जनता दल (यूनाइटेड) / JD(U)। ददन यादव ‘पहलवान’ — बहुजन समाज पार्टी (BSP)। शिवांग विजय सिंह — जन सुराज पार्टी
सर्वे क्या बता रहा है
स्थानीय सर्वे के अनुसार डुमराँव का चुनाव त्रिकोणीय युद्ध बनकर उभरा है, जिसमें भाकपा-माले के अजीत कुशवाहा नजरिए और जमीनी सक्रियता के चलते बढ़त पर हैं। JD(U) और BSP के उम्मीदवार दोनों पारंपरिक वोट बैंक और क्षेत्रीय ताक़त के साथ चुनौती दे रहे हैं, जबकि जनसुराज की एंट्री ने चुनावी समीकरण और भी जटिल कर दिए हैं — जिससे वोट बंटने की संभावना बढ़ी है।
स्थानीय मुद्दे और चुनावी कहानी
डुमराँव के मतदाताओं के लिए इस बार विकास-सम्बंधी मुद्दे (सड़क, शिक्षा, रोजगार) ज्यादा अहम दिख रहे हैं। भाकपा-माले की पकड़ परिधीय और पिछड़े वर्गों में मजबूत मानी जाती है, वहीं JD(U) का क्लासिक लोकल नेटवर्क और BSP का समाज-आधारित वोट बैंक निर्णायक हो सकते हैं। जनसुराज ने शहर-गाँव दोनों में युवा और विकास-उन्मुख संदेश के साथ सेंध लगाने का प्रयास किया है, जो पारंपरिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
डुमराँव में फिलहाल जो सर्वे दिखा रहा है, उसके मुताबिक अजीत कुशवाहा (भाकपा-माले) आगे हैं। फिर भी स्थानीय वोट-बंटवारे, उम्मीदवारों की आख़िरी रणनीतियाँ और चुनावी माहौल (प्रचार, गठबन्धन, मतदान केंद्रों पर लहर) अंतिम नतीजे तक सब बदल सकते हैं।

भोतिकी एवं राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस बार की सभा: डुमराँव विधानसभा क्षेत्र। ताज़ा सर्वेक्षण के अनुसार यहाँ एक त्रिकोणीय मुकाबला सामने आ रहा है, जिसमें
अजीत कुशवाहा (CPI(ML) Liberation / भाकपा-माले) सबसे आगे दिख रहे हैं, इसके पीछे क्रमशः राहुल कुमार सिंह (Janata Dal (United) / JD(U)) और ददन यादव ‘पहलवान’ (Bahujan Samaj Party / BSP) हैं, जबकि चौथे स्थान पर शिवांग विजय सिंह (जन सुराज पार्टी) का नाम आ रहा है।
सर्वे की मुख्य बातें
सर्वे में भाकपा-माले के उम्मीदवार अजीत कुशवाहा को सबसे ऊपर आंका गया है, जो कई मतदाताओं में “नए नेतृत्व एवं विकास-उन्मुख” चेहरा बनकर उभरे हैं। राहुल कुमार सिंह और ददन यादव ‘पहलवान’ दोनों ही अपने-अपने हिस्से में मजबूत पकड़ दिखा रहे हैं। इनके पारंपरिक वोट बैंक एवं संगठनात्मक नेटवर्क इस बार चुनौती का सामना कर रहे हैं। शिवांग विजय सिंह, हालांकि पिछड़े नजर आ रहे हैं, लेकिन उनकी पार्टी ने युवा चुनौतियों और स्थानीय मुद्दों को उठाकर स्थिति को प्रभावित करने की कोशिश की है। स्थानीय मत-धाराएँ विकास, बेरोजगारी, सड़क-संरचना और शिक्षा जैसे मुद्दों पर अधिक केंद्रित हैं और इसने पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों को चुनौती दी है।
विश्लेषण: क्या मायने रखेगा?
अजीत कुशवाहा की बढ़त उनके सक्रिय स्थानीय काम, भाकपा-माले की क्षेत्रीय सक्रियता और वोट बंटने की परिस्थिति से जुड़ी हुई है। राहुल कुमार सिंह और ददन यादव ‘पहलवान’ को यदि अपने वोट बैंक को मजबूत रख पाते हैं, तो अंतिम परिणाम तक यह मुकाबला बेहद टाइट हो सकता है। चौथे स्थान से उठने वाला उम्मीदवार वोट बंटवारे को प्रभावित कर सकता है एवं यह ट्राय कॉर्नर मुकाबले की दिशा बदल सकता है। उम्मीदवारों की प्रचार रणनीति, गठबन्धन समीकरण, बूथ-मैनेजमेंट और चुनावी माहौल (मौसम, मतदान उत्साह) निर्णायक होंगे।
निष्कर्ष
डुमराँव सीट इस बार बिहार के विधानसभा चुनाव 2025 में सबसे रोचक सीटों में से एक बन चुकी है। सर्वे के अनुसार यदि रुझान नहीं बदले तो अजीत कुशवाहा भारी दावेदारी के साथ उभर सकते हैं। लेकिन राजनीतिक रणभूमि में “कुछ भी हो सकता है” की पुरानी कहावत अभी पूरी तरह लागू होगी — विशेष रूप से वोट बंटवारे, स्थानीय उठापटक और प्रत्याशियों की आख़िरी मुहिम अंतिम परिणाम तय कर सकती है।