
बिहार में 2025 का विधानसभा चुनाव एक ऐतिहासिक मुकाबले की ओर बढ़ रहा है। इस बार लड़ाई सिर्फ NDA बनाम महागठबंधन (RJD-कांग्रेस-लेफ्ट) तक सीमित नहीं है — मैदान में तीसरा मोर्चा भी उतर चुका है, जिसका नेतृत्व प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी (Jan Suraaj Party) कर रही है।
राजनीतिक समीकरण बदल रहे हैं, पुराने गठबंधन कमजोर पड़ रहे हैं और मतदाता नए विकल्पों की तलाश में दिख रहे हैं।
⸻
🗓️ चुनावी तैयारी और संभावित तिथियाँ
विधानसभा का कार्यकाल 22 नवंबर 2025 को समाप्त हो रहा है। चुनाव आयोग ने चुनावी तैयारियों की समीक्षा कर ली है और संकेत दिए हैं कि छठ पूजा के तुरंत बाद बिहार में एक या दो चरणों में मतदान कराया जा सकता है।
इस बार चुनाव आयोग 470 से अधिक केंद्रीय पर्यवेक्षक तैनात करेगा ताकि निष्पक्ष और पारदर्शी मतदान हो सके।
⸻
📋 मतदाता सूची विवाद — चुनाव से पहले की सबसे बड़ी हलचल
बिहार की अंतिम मतदाता सूची में लगभग 38 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। महिलाओं के नाम हटने की दर पुरुषों से लगभग दोगुनी रही, जिससे विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग पर पक्षपात के आरोप लगाए हैं।
कांग्रेस और RJD ने इस मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट तक गुहार लगाई है।
यह विवाद चुनावी माहौल को और गर्म कर रहा है।
⸻
⚖️ मुख्य मुकाबला — NDA बनाम महागठबंधन
🔸 NDA (BJP + JDU)
नीतीश कुमार एक बार फिर मुख्यमंत्री पद के दावेदार के रूप में NDA का चेहरा हैं। भाजपा संगठन स्तर पर अपने पुराने वोट बैंक को फिर से सक्रिय करने की कोशिश में है।
भाजपा ने आयोग को 16 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा है, जिसमें सुरक्षा, मतदान प्रक्रिया की पारदर्शिता और बूथ हिंसा पर रोक लगाने की बात शामिल है।
🔸 महागठबंधन (RJD + कांग्रेस + वाम दल)
तेजस्वी यादव इस गठबंधन के सर्वसम्मत चेहरा बने हुए हैं। बेरोज़गारी, पलायन, शिक्षा और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर RJD सरकार पर सीधा हमला बोल रही है।
सर्वे बताते हैं कि तेजस्वी यादव युवाओं में सबसे लोकप्रिय नेता बने हुए हैं।
⸻
🟢 तीसरा मोर्चा — प्रशांत किशोर का ‘जन सुराज’
बिहार की राजनीति में इस बार सबसे ज्यादा चर्चा जिस नाम की है, वह है प्रशांत किशोर।
उनकी पार्टी जन सुराज पार्टी (Jan Suraaj Party) अब “तीसरा मोर्चा” बनकर NDA और RJD दोनों के सामने चुनौती पेश कर रही है।
• पार्टी ने राज्य के लगभग हर जिले में संगठन खड़ा कर लिया है।
• “जनता से संवाद, सत्ता से सवाल” के नारे के साथ प्रशांत किशोर गाँव-गाँव घूम रहे हैं।
• जन सुराज ने साफ किया है कि वह किसी भी गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेगी, बल्कि एक विकल्प के रूप में चुनाव लड़ेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि जन सुराज पार्टी को 8–10% वोट भी मिलते हैं, तो वह कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभा सकती है — खासकर सिवान, गोपालगंज, मोतिहारी, दरभंगा और चंपारण जैसे इलाकों में।
⸻
💬 प्रमुख मुद्दे
• बेरोज़गारी और पलायन: बिहार से युवाओं के पलायन को लेकर NDA पर विपक्ष और जन सुराज दोनों हमलावर हैं। सरकार ने पलायन रोकने के लिए 62,000 करोड़ रुपये की नई योजनाएँ शुरू की हैं।
• शिक्षा और स्वास्थ्य: शिक्षा व्यवस्था की बदहाली इस बार बड़ा चुनावी मुद्दा बनने जा रही है।
• जातीय समीकरण: EBC और युवा वोटर्स को लुभाने के लिए तीनों मोर्चे (NDA, महागठबंधन और जन सुराज) अपनी रणनीति में बदलाव कर रहे हैं।
⸻
📊 राजनीतिक समीकरणों का बदलता संतुलन
मोर्चा प्रमुख दल मुख्यमंत्री चेहरा फोकस क्षेत्र
NDA भाजपा + जेडीयू नीतीश कुमार विकास, कानून व्यवस्था
महागठबंधन आरजेडी + कांग्रेस + लेफ्ट तेजस्वी यादव बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार, पलायन
तीसरा मोर्चा जन सुराज पार्टी प्रशांत किशोर सुशासन, नई राजनीति, पारदर्शिता
⸻
🗣️ निष्कर्ष
बिहार की राजनीति में इस बार का चुनाव “त्रिकोणीय” होने की पूरी संभावना है।
जहाँ नीतीश कुमार अनुभव के साथ उतर रहे हैं, तेजस्वी यादव युवा जोश के साथ चुनौती दे रहे हैं, वहीं प्रशांत किशोर नई राजनीति और वैकल्पिक सोच का संदेश लेकर मैदान में हैं।
जन सुराज पार्टी यदि उम्मीदों पर खरी उतरती है, तो यह चुनाव बिहार की राजनीति का चेहरा हमेशा के लिए बदल सकता है।