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राजपुर विधानसभा चुनाव 2025: कांग्रेस के विश्वनाथ राम को सर्वे में बढ़त, जदयू के पूर्व मंत्री संतोष निराला दूसरे नंबर पर, जन सुराज के धनंजय पासवान भी मैदान में

राजपुर (बक्सर)।

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का माहौल अब चरम पर है, और बक्सर जिले की राजपुर (अनुसूचित जाति आरक्षित) सीट इस बार सुर्खियों में है।

ताजा सर्वे के अनुसार, कांग्रेस के मौजूदा विधायक विश्वनाथ राम अब भी बढ़त बनाए हुए हैं, लेकिन इस बार उन्हें तीन ओर से कड़ी चुनौती मिल रही है —

जदयू के पूर्व मंत्री संतोष निराला, बहुजन समाज पार्टी (BSP) के मनोज राम, और जन सुराज पार्टी के धनंजय पासवान मैदान में हैं, जिससे मुकाबला अब चौकोणीय (Four-Cornered Fight) बन चुका है।

ताजा सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस के मौजूदा विधायक विश्वनाथ राम को सबसे अधिक समर्थन मिलता दिख रहा है। वहीं जदयू के पूर्व मंत्री संतोष निराला दूसरे स्थान पर हैं।

तीसरे स्थान पर जन सुराज पार्टी के धनंजय पासवान ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है।

🔹 पिछला चुनाव (2020) का परिणाम

विजेता: विश्वनाथ राम (कांग्रेस) – 67,871 वोट (36.8%) उपविजेता: संतोष निराला (जदयू) – 46,667 वोट (25.3%) जीत का अंतर: 21,204 वोट कुल मतदान: 56.9% (स्रोत: निर्वाचन आयोग / OneIndia / TOI डेटा)

🔹 बूथवार समीकरण

राजपुर नगर पंचायत और आसपास के वार्डों में भाजपा-जदयू को बढ़त। कुरथियाँ, सिवान, कोडर जैसे दलित बहुल इलाकों में कांग्रेस का दबदबा बरकरार। युवा मतदाताओं वाले इलाकों — जैसे रामपुर, बभनपुरा और मीरगंज — में जन सुराज पार्टी के धनंजय पासवान तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।

🔹 स्थानीय मुद्दे जो चुनाव में असर डाल रहे हैं

ग्रामीण सड़कों और पुलिया निर्माण की धीमी गति। किसानों के लिए बिजली और सिंचाई सुविधा की कमी। बेरोजगारी और पलायन की समस्या। शिक्षा और स्वास्थ्य केंद्रों की खराब स्थिति। शराबबंदी कानून के दुरुपयोग को लेकर नाराज़गी।

🔹 सामाजिक और जातीय समीकरण

राजपुर विधानसभा सीट पर लगभग 65% दलित और पिछड़ा वर्ग मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

कांग्रेस के विश्वनाथ राम को पारंपरिक दलित व गरीब तबकों का समर्थन मिल रहा है। जदयू के संतोष निराला को सवर्ण और जदयू कार्यकर्ताओं का मजबूत नेटवर्क लाभ दे रहा है। बसपा के मनोज राम दलित समाज में तेजी से पैठ बना रहे हैं, खासकर उन इलाकों में जहाँ कांग्रेस की पकड़ कमजोर है। जन सुराज पार्टी के धनंजय पासवान युवा और बदलाव चाहने वाले मतदाताओं में प्रभाव बना रहे हैं।

🔹 चुनाव के मुख्य मुद्दे

रोजगार और पलायन: क्षेत्र से बाहर मजदूरी पर जाने वाले युवाओं की समस्या।

सड़क और स्वास्थ्य सुविधाएँ: कई पंचायतों में अब भी सड़क व अस्पतालों की हालत खराब।

दलित कल्याण योजनाओं का क्रियान्वयन: वोटरों का बड़ा वर्ग इन योजनाओं के प्रभाव से प्रभावित।

शराबबंदी कानून: महिलाओं में समर्थन, लेकिन युवाओं में नाराज़गी।

🔹 राजनीतिक विश्लेषण

राजपुर सीट पर इस बार तस्वीर बेहद जटिल है।

जहाँ कांग्रेस के विश्वनाथ राम अभी भी आगे हैं, वहीं जदयू के संतोष निराला अपने संगठन और पूर्व मंत्री के अनुभव से मैदान गरमाए हुए हैं।

बसपा के मनोज राम का उभरना दलित मतों में सेंध लगाता दिख रहा है, जो कांग्रेस के लिए चुनौती बन सकता है।

जन सुराज पार्टी भले चौथे स्थान पर है, लेकिन युवाओं और नई राजनीति के नाम पर चर्चा में बनी हुई है।

🔹 संभावित समीकरण

अगर बसपा का प्रदर्शन अच्छा रहा, तो यह मुकाबला कांग्रेस के लिए कठिन हो सकता है, क्योंकि बसपा और कांग्रेस का मतदाता आधार काफी हद तक समान है।

वहीं जदयू एनडीए की लहर और केंद्र की योजनाओं के नाम पर समर्थन जुटाने में लगी है।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार —

“राजपुर में कांग्रेस फिलहाल आगे है, पर बसपा की सक्रियता और जदयू का संगठन यदि साथ आया तो समीकरण बदल सकते हैं।”

🔹 निष्कर्ष

राजपुर की जंग अब “चौकोणीय मुकाबले” में बदल चुकी है —

कांग्रेस अपने जनाधार को बचाने की कोशिश में, जदयू सत्ता और अनुभव के सहारे, बसपा नए दलित वोट बैंक के साथ मैदान में, और जन सुराज युवाओं को साथ लेकर नई राजनीति का दावा कर रही है।

आने वाले हफ्तों में प्रचार अभियान और जातीय समीकरण यह तय करेंगे कि 2025 में राजपुर का ताज किसके सिर सजेगा।

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