हरिद्वार। राजनीति के अखाड़े में बयानों के बाण अब तीखे होते जा रहे हैं। ‘बटेंगे तो कटेंगे’ के नारे के बाद अब एक नया मोर्चा खुल गया है। राष्ट्रीय सेवा संघ के प्रमुख स्तंभ और प्रखर वक्ता स्वामी विवेकानंद सरस्वती (नागा संन्यासी) ने भारतीय जनता पार्टी की वर्तमान कार्यप्रणाली और उनके बयानों पर तीखा प्रहार किया है।
स्वामी जी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिस तरह की राजनीति आज देखने को मिल रही है, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि “अब बीजेपी खुद ही कह रही है कि हम ही बाँटेंगे और हम ही काटेंगे।”
सत्ता के मद में मूल सिद्धांतों की अनदेखी
एक विशेष चर्चा के दौरान स्वामी विवेकानंद सरस्वती ने कहा कि जो संगठन और पार्टी कभी हिंदू एकता और ‘अंत्योदय’ की बात करते थे, आज वे केवल चुनावी समीकरणों में उलझ कर रह गए हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा:
“धर्म और राष्ट्र की रक्षा के लिए संन्यासी हमेशा आगे रहा है, लेकिन जब राजनीति समाज को एकजुट करने के बजाय भय और विभाजन का सहारा लेने लगे, तो यह राष्ट्रहित में नहीं है। आज भाजपा जिस दिशा में बढ़ रही है, वह अपनों को ही किनारे लगाने और समाज में दरार पैदा करने वाली प्रतीत होती है।”
राष्ट्रीय सेवा संघ का रुख
स्वामी जी ने जोर देकर कहा कि राष्ट्रीय सेवा संघ का उद्देश्य समाज को जोड़ना और राष्ट्र को परम वैभव पर ले जाना है। लेकिन वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में ‘बाँटने’ की नीति स्पष्ट दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि टिकटों का बँटवारा हो या विचारधारा का प्रसार, जमीन पर काम करने वाले निष्ठावान कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज किया जा रहा है।
मुख्य बिंदु: स्वामी जी के वक्तव्य के अंश
• विभाजनकारी राजनीति: उन्होंने आरोप लगाया कि नारों की आड़ में असल मुद्दों से ध्यान भटकाया जा रहा है।
• कार्यकर्ताओं की उपेक्षा: पुराने और समर्पित लोगों को काटकर नए और अवसरवादियों को गले लगाया जा रहा है।
• धर्म का राजनीतिकरण: धर्म का उपयोग सत्ता प्राप्ति के लिए करना उचित नहीं है; राजनीति का उपयोग धर्म (कर्तव्य) की स्थापना के लिए होना चाहिए।
स्वामी विवेकानंद सरस्वती नागा संन्यासी ने उठाई ‘गौमाता को राष्ट्रमाता’ बनाने की माँग
हरिद्वार/ऋषिकेश। राजनीति के गलियारों में ‘बटेंगे तो कटेंगे’ के नारों के बीच अब संतों का आक्रोश फूट पड़ा है। स्वामी विवेकानंद सरस्वती (नागा संन्यासी, राष्ट्रीय सेवा संघ) ने भारतीय जनता पार्टी की वर्तमान नीतियों और बयानों पर कड़ा प्रहार करते हुए एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। स्वामी जी ने सीधे तौर पर कहा कि आज की राजनीति का स्वरूप ऐसा हो गया है कि “अब बीजेपी कह रही है हम ही बाँटेंगे और हम ही काटेंगे।”
गौमाता की उपेक्षा पर गहरा रोष
स्वामी विवेकानंद सरस्वती ने केवल चुनावी राजनीति पर ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक उपेक्षा पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने पुरजोर तरीके से माँग उठाई कि गाय को अविलंब ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा दिया जाए।
स्वामी जी ने कहा:
“जो पार्टी हिंदुत्व के नाम पर सत्ता में आई, वह आज गाय की दुर्दशा पर मौन क्यों है? हम केवल वोट बैंक के लिए ‘बटने और कटने’ की बातें नहीं सुनना चाहते। यदि सरकार वास्तव में हिंदू अस्मिता की रक्षक है, तो गौवंश को संवैधानिक रूप से राष्ट्रमाता घोषित करे और उनके वध पर पूर्ण प्रतिबंध लगाए।”
सत्ता के मद में मूल सिद्धांतों की बलि
राष्ट्रीय सेवा संघ के बैनर तले अपनी बात रखते हुए स्वामी जी ने चेतावनी दी कि सत्ता के मद में अपनों को ही किनारे किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा की मौजूदा कार्यशैली से ऐसा प्रतीत होता है कि वे समाज को एकजुट करने के बजाय अपने ही कार्यकर्ताओं और विचारधारा को ‘काटने’ में लगे हैं।

चेतावनी और आह्वान
अंत में स्वामी विवेकानंद सरस्वती जी ने आगाह किया कि यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो समाज इसका करारा जवाब देगा। उन्होंने कहा, “हम संन्यासी हैं, हमें सत्ता का मोह नहीं है, लेकिन जब-जब समाज को बाँटने की कोशिश होगी, नागा साधु और संन्यासी समाज चुप नहीं बैठेगा।”